लाभेश लाभ भाव में वा केंद्र - त्रिकोण में हो वा अपने उच्च में वा सूर्यांश में हो तो भी फल का बहुत लाभ होता है।
लाभेश धन राशि में हो और धनेश केंद्र में हो तथा बृहस्पति से युत हो तो अधिक लाभ होता है।
लाभेश लाभ भाव में शुभ ग्रह से युत हो तो 36वें वर्ष में 2 सहस्त्र निष्क (मोहर) का लाभ होता है।
लाभेश शुभ ग्रह से युत होकर केंद्र त्रिकोण में हो तो 40 वें वर्ष में 500 मोहर का लाभ होता है।
लाभ भाव में बृहस्पति हो और धन भाव में चंद्रमा हो तथा भाग्य भाव में शुक्र हो तो 6 हजार मोहर का अधिपति होता है।
लाभ स्थान से लाभ में बृहस्पति चंद्रमा से युत हो तो धन धान्य का स्वामी, श्रीमान, रत्न आदि आभूषणों से युक्त होता है।
लाभेश लग्न में हो और लग्नेश लाभ भाव में हो तो 33 वें वर्ष में 1 हजार मोहर का लाभ होता है।
धनेश लाभ भाव में और लाभेश धन भाव में हो तो विवाह के बाद अनेक प्रकार से भाग्योदय होता है।
तृतीयेश 11वें भाव में और लाभेश तीसरे भाव में हो तो भाइयों से धन का लाभ होता है।
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