धनेश यदि,
लग्न में हो तो जातक पुत्रवान, अपने कुटुंब का कंटक, धनी, निष्ठुर, कामी और दूसरे के कार्य में तत्पर होता है।
धन भाव में हो तो जातक धनी, धर्म से युक्त होता है। उसे 2 या 3 स्त्रियां होती है और पुत्रहीन होता है।
तीसरे या चौथे भाव में हो तो जातक पराक्रमी, बुद्धिमान, गुणी, पराई स्त्री का अभिमान करने वाला, लोभी या देवनिंदक होता है।
पांचवें भाव में हो तो जातक पुत्र से धनी, कृपण, दुःख भोगने वाला, यशश्वी और पुत्रवान होता है।
छठे भाव में हो तो जातक शत्रु से धन प्राप्त करने वाला, पुत्र द्वारा धन नाश वाला और जंघा तथा उरू प्रदेश में रोग युक्त होता है।
सातवें भाव में हो तो जातक वैद्य होता है, परस्त्रीगामी होता है। उसकी स्त्री वैश्या और माता व्यभिचारिणी होती है।
आठवें भाव में हो तो जातक को भूमिगत द्रव्य का लाभ, स्त्री का सुख अल्प और ज्येष्ठ भाई का सुख नहीं होता है।
नवम या लाभ भाव में हो तो जातक धनी, उद्यमी, विद्वान होता है। बाल्य काल में रोगी और पीछे आयु पर्यन्त सुखी होता है।
दशम भाव में हो तो जातक कामी, मानी पंडित, अनेक स्त्री तथा धन से युक्त और पुत्र हीन होता है।
बारहवें भाव में हो तो जातक ज्ञानी, साहसी, धनहीन, राजगृह से जीविका वाला और ज्येष्ठ पुत्र के सुख से हीन होता है।
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