अष्टम भाव

 


अष्टमेश पाप ग्रह और लग्नेश के साथ आठवें भाव में हो तो जातक अल्पायु होता है। इसी प्रकार तर्क द्वारा शनि और कर्मेश से भी आयु का विचार करना चाहिए।


षष्ठेश 6/12वें भाव में हो और व्ययेश 6/12वें भाव में हो अथवा लग्न वा आठवें भाव में हो तो दीर्घायु होता है।


लग्नेश, अष्टमेश और पंचमेश अपने भाव में, अपने नवांश मे या मित्र की राशि में हो तो दीर्घायु होता है।


लग्नेश, अष्टमेश, कर्मेश और शनि केंद्र - त्रिकोण और लाभ भाव में हो तो दीर्घायु होती है।


अष्टमेश केंद्र में हों और लग्नेश निर्बल हो तो 20/32 वर्ष की आयु होती है।


अष्टमेश अपनी नीच राशि में हो, अष्टम भाव में पाप ग्रह हो और लग्नेश दुर्बल हो तो अल्पायु होता है।


अष्टमेश पाप ग्रह से युक्त हो, आठवें और बारहवें भाव में पाप ग्रह हो तो उत्पन्न होते ही मृत्यु हो जाती है।


केंद्र - त्रिकोण में पाप ग्रह हो, 6/8 भाव में शुभ ग्रह हो, लग्न में अष्टमेश अपनी नीच राशि का हो तो शीघ्र ही मृत्यु होती है।


पांचवें भाव में पाप ग्रह हो, अष्टमेश पाप ग्रह से युत हो और अष्टम भाव पाप ग्रह से युत हो तो अल्पायु होती है।


अष्टमेश आठवें भाव में और चंद्रमा पाप युक्त हो, शुभ ग्रह से न देखा जाता हो तो मास के अंत में मृत्यु होती है।


लग्नेश अपनी उच्च राशि में हो और चंद्रमा लाभ भाव में हो तथा आठवें भाव में बृहस्पति हो तो दीर्घायु होती है, इसमें संशय नहीं है।

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