नवम / भाग्य भाव के स्वामी का विभिन्न भावों में फल

 


भाग्येश यदि,

लग्न या सप्तम भाव में हो तो जातक गुणी, कीर्ति युक्त होता है। उसे जिस कार्य की इच्छा होती है वह कभी सिद्ध नहीं होता है।


दूसरे या तीसरे भाव में हो तो जातक सदा भाग्यवान, धनी, गुणी, कामी, पंडित और जनवल्लभ होता है।


चतुर्थ या दशम भाव में हो तो जातक मंत्री वा सेनापति, पुण्य वान, यशश्वी, बुद्धिमान, साहसी और क्रोध रहित होता है।


पांचवें या एकादश भाव में हो तो जातक भाग्यवान, जनता का प्रेमी, गुरु की भक्ति में आसक्त, मानी तथा धीर होता है।


छठे, आठवें, बारहवें भाव में हो तो जातक भाग्य हीन, माता के और ज्येष्ठ भाई के सुख से हीन होता है।

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