तृतीय/ सहज भाव के स्वामी का विभिन्न भावों में फल

 


सहजेश यदि,

लग्न या लाभ भाव में हो तो जातक अपनी कमाई से धनी, मूर्ख, कृश, महारोगी अपितु साहसी, दूसरे का सेवक होता है।


दूसरे भाव में हो तो जातक स्त्री के स्वभाव का, स्थूल, परस्त्री के धन से कार्य आरंभ करने वाला और सुखी नहीं होता है।


तीसरे भाव में हो तो जातक पराक्रमी, पुत्रवान, धनी, प्रसन्न और अद्भुत सुख को भोगने वाला होता है।


चौथे, पांचवें और दशवे भाव में हो तो जातक सदा सुखी, अति क्रूर स्त्री से युक्त, धनी और बुद्धिमान होता है।


छठे भाव में हो तो जातक का भाई शत्रु होता है। जातक स्वयं महाधनी, मामा के सुख से हीन और मामी से संभोग की इच्छा वाला होता है।


सातवें या आठवें भाव में हो तो जातक की मृत्यु राजदरबार में होती है, चोर, परस्त्रीगामी और बाल्य काल में कष्ट भोगने वाला होता है।


भाग्य भाव या बारहवें भाव में हो तो जातक का भाग्योदय स्त्री के द्वारा होता है और उसका पिता बड़ा चोर होता है।

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