राशियों का ज्ञान



मैत्रेय ऋषि बोले - जो व्यक्त (प्रकट रूप) विष्णु काल (समय) रूपी जनार्दन हैं, उनके अंगों का ज्ञान क्रम से मेषादि बारह राशियों द्वारा बताइए।


पराशर ऋषि बताते हैं अहोरात्र शब्द के आदिम वर्ण और अंतिम वर्ण का लोप हो जाने से होरा शब्द होता है, जिसका ज्ञान होने से जातक के शुभ - अशुभ फल का ज्ञान होता है।


जन्मलग्न से बारह राशियां क्रम से निम्नलिखित हैं


मेष शिर

वृषभ मुख

मिथुन दोनों भुजाएं

कर्क हृदय

सिंह पेट

कन्या कटि

तुला बस्ति (नाभिलिंग के मध्यभाग को बस्ति कहते हैं)

वृश्चिक गुह्यस्थान (स्त्री - पुरुष के चिन्ह)

धनु उरु

मकर दोनों जानु

कुम्भ जंघे

मीन


दोनों चरण काल पुरुष के अंग में हैं। मेष आदि राशियों की क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव तथा क्रूर, शुभ और पुरुष स्त्री संज्ञाएं हैं।


पित्त, वायु, कफ तीनों मिले हुए हैं।


मेष राशि का लाल वर्ण, बड़ी शरीर, चार पैर, रात में बलवान हैं, पूर्व दिशा, क्षत्रिय वर्ण, पर्वतीय प्रदेश में घूमने वाली, रजोगुणी, पृष्ठोदयी, अग्नि राशि है और इसके स्वामी मंगल हैं।


वृषभ राशि का श्वेत वर्ण, लंबी शरीर, चार पैर, रात्रि में बलवान हैं। दक्षिण दिशा, ग्रामवासी, वैश्य वर्ण, भूमि प्रिय, पृष्ठोदयी है और शुक्र इसके स्वामी हैं।


मिथुन राशि शीर्षोदयी, पुरुष स्त्री, पुरुष गदा को लिए और स्त्री वीणा को लिए हुए, पश्चिम दिशा का स्वामी, दो पैर, रात्रि में बलवान हैं। ग्रामवासी, वायु प्रकृति, समान(चौखुटी) शरीर, हरे रंग की है और बुध इसके स्वामी हैं।


कर्क राशि का पाटल (थोड़ा लाल और सफेद मिला हुआ) वर्ण, वनचारी, ब्राह्मण वर्ण, रात में बलवान है। अत्यन्त विद्वान, स्थूल शरीर, जल में रहने वाली, पृष्ठोदयी राशि है और चंद्रमा इसके स्वामी हैं।


सिंह राशि सतोगुणी, चार पैर, क्षत्रिय वर्ण, बलवान, शीर्षोदयी राशि, लंबी शरीर, पांडु वर्ण, पूर्व दिशा का स्वामी, दिन में बलवान है और सूर्य इसके स्वामी हैं।


कन्या राशि पर्वत में विशेष रुचि वाली, दिन में बलवान है। शीर्षोदयी राशि, मध्यम, शरीर, दो पैर, दक्षिण दिशा में रहने वाली, वैश्य वर्ण है।

धान को भूजती हुई, चित्र वर्ण (छींट) के वस्त्र को पहने हुई कन्या तमोगुण से युक्त बाल भाव वाली है और बुध इसके स्वामी हैं।


तुला राशि शीर्षोदयी, दिन में बलवान है। शूद्र वर्ण, रजोगुणी, पश्चिम दिशा की स्वामी, मध्यम शरीर वाली है और शुक्र इसके स्वामी हैं।


वृश्चिक राशि शीर्षोदयी, छोटा शरीर, अनेक चरण, ब्राह्मण वर्ण, उत्तर दिशा में बलवान, दिन में बलवान है। धूम्र वर्ण जलीय भूमि पर चलने वाली है। रोम से युक्त शरीर, अत्यन्त तीखे अंगो वाली है और मंगल इसके स्वामी हैं।


धनु राशि को घोड़े का जंघा है, सात्विक राशि है। पिंगल वर्ण, रात्रि में बलवान, अग्नि राशि, क्षत्रिय वर्ण, पूर्वार्ध दो पैर और उत्तरार्ध चार पैर, समान शरीर, धनुष को लिए हुए है।

पूर्व दिशा के स्वामी, भूमि पर रहने वाली, तेजस्वी, पृष्ठोदयी है और बृहस्पति इसके स्वामी हैं।


मकर राशि तमोगुणी, भू तत्व, दक्षिण दिशा का स्वामी, रात्रि में बलवान है।

पृष्ठोदयी, बड़ा शरीर, जलीय भूमि में चलने वाली, पूर्वार्ध में चार पैर और उत्तरार्ध में द्विपद, जल में रहने वाली है और शनि इसके स्वामी हैं।


कुम्भ राशि घड़ा लिए हुए, पुरुष नेवले के रंग के जैसा (भूरा), वर्ण, मध्यम शरीर, दो पैर, दिन में बलवान है। जल में रहने वाली (जलचर), वायु प्रकृति, शीर्षोदयी, तम प्रकृति है।

शूद्र वर्ण, पश्चिम देश वा दिशा का स्वामी है और शनि इसके स्वामी हैं।



मीन राशि दो मछलियों में एक का मुख दूसरे की पूंछ में लगा हुआ स्वरूप, दिन में बलवान है।

जलचर, सतोगुणी, ब्राह्मण वर्ण, बिना पैर का, मध्यम शरीर, उत्तर दिशा का स्वामी, उभयोदयी और इसके स्वामी बृहस्पती हैं।


इस प्रकार मैंने 30 अंश के राशियों का स्वरूप कहा, इनके स्थूल और सूक्ष्म फल ग्रंथो में कहे हुए हैं।

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