एकादश / लाभ भाव के स्वामी का विभिन्न भावों में फल

 


लाभेश यदि,

लग्न में हो तो जातक धनी, सात्विक, समदृष्टि, वक्ता और कौतुकी होता है।


दूसरे या पांचवें भाव में हो तो जातक अनेक सुखों से युक्त, पुत्रवान, धार्मिक और सभी पदार्थो से युक्त होता है।


तीसरे या चौथे भाव में हो तो जातक तीर्थयात्रा में तत्पर, सभी कार्यों में कुशल और शूलरोग से युक्त होता है।


छठे भाव में हो तो जातक अनेक रोगों से युक्त, प्रवासी और दूसरे का नौकर होता है।


सातवें या आठवें भाव में हो तो जातक की स्त्री नहीं होती है। वह गुणी, उदार और मूर्ख होता है।


दशम या नवम भाव में हो तो जातक राजा से पूज्य, धनी, चतुर, सत्यवक्ता और अपने धर्म से युत होता है।


लाभ भाव में हो तो जातक बुद्धिमान, पंडित और कवि होता है।


बारहवें भाव में हो तो जातक नीचों से संसर्ग करने वाला, कामी, अनेक स्त्रियों वाला और लंपट होता है।

Comments