आंतरिक बल -604

 


-बिंदु  रूप का अभ्यास -47 - संगीत 


-पित  का रोग होने पर राग खमाज सुनना चाहिये । 


-ख़ाना खाते समय  गिरते पानी तथा हवा जैसा  प्राकृतिक संगीत सुनना चाहिये । 


-भागवान आप  शांति  के सागर हैं इस वाक्य को दोहराते रहो ।  पित शान्त हो जाएगा । 


- शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिये राग जय  जयवन्ती सुनना चाहिए  यां कोई मन पसंद गीत गुन  गुनाना चाहिए । 


-उत्साह के लिये थोड़ा तेज संगीत सुनना चाहिए । 


-वीर रस की गाथाएँ या  कविताए सुननी  चाहिये । 


-जिन की यादाशत कम है  या कम  हो रही है,   उन्हे राग शिव रंजनी  सुनना चाहिये । 


-वीणा वादन वा बांसुरी सुनने से भी लाभ मिलता  है । 


-खून की कमी या शारीरिक  कमजोरी को दूर करने लिये मृदंग और ढोलक से उत्साह का संचार होता है । 


-मनोरोग अथवा डिपरेशन में राग बिहाग  व राग मधुवण्ती  सुनना चाहिए । 


-घुंघरू और तबला  सुनने से भी मन प्रसन्न होता है ।


- उच्च रक्तताप में धीमी गति का संगीत सुने और निम्न रक्तचाप में तेज गति का संगीत सुने । 


-सांस या अस्थमा के रोग में रसगुल्ले मालकोस  वा राग ललित से संबंधित गीत सुनने चाहिये । 


-समुन्दर की लहरे   या पानी की कल कल सुनने से बहुत फायदा होता है । 


-ऊंची और असमान ध्वनि का वात  पर,  गंभीर वा स्थिर ध्वनि का पित  पर  तथा कोमल व मृदु  ध्वनि  का कफ पर प्रभाव पड़ता है । 


-संगीत से वात,  पित और कफ को संतुलित  कर के हम रोगों  से बच सकते है ॥ 


-समुन्द्र गुप्त जब वीणा वादन करते थे तो उसके उपवन में वसंत ऋतु का अनुभव होता था । 


-संगीत द्वारा पेड़ पौधो को रोगों से बचाया जा सकता है । 


-कोई भी संगीत सुनते समय मन  में बिंदू रूप परमात्मा को याद करते रहो तब संगीत की शक्ति लाखो गुणा बढ़ जाती है ।


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B K  Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516

    

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