-बिंदू रूप का अभ्यास -45- संगीत
-संगीत की भाषा संसार का प्रत्येक प्राणी समझता हैँ ।
- संगीत प्राकृति की भाषा से मेल खाता हैं ।
-संगीत मनुष्य को हर पल प्रभावित करता हैँ ।
-संगीत कानो के द्वारा शरीर में घुस जाता हैँ और शरीर के सभी रोगो को ठीक करने में लग जाता हैँ ।
-संगीत से उत्पन्ऩ तरंगे शरीर की प्रत्येक कोशिका को प्रभावित करती हैँ ।
-अगर हम भागवान के बिंदू रूप को संगीत सुनते हुए याद करते हैँ तो रोगो को ठीक करने में संगीत की शक्ति बढ़ जाती हैँ ।
-भागवान की याद का बल सूक्ष्म होता हैँ । जब भागवान को संगीत सुनते हुए याद करते हैँ तो भागवान की शक्ति संगीत में प्रवेश कर जाती हैँ और ध्वनि का रूप धारण लेती हैँ ।
-भगवान की याद मेंं सुने गये संगीत से ऐसे हार्मोन बनने लगते हैं जिन से सभी रोग ठीक होते जाते हैं ।
-घर के कामकाज करते, भोजन बनाते समय अगर संगीत सुनते रहें तो संगीत का प्रभाव भोजन पर भी होगा और ऐसा भोजन हमें तंदरुस्त बनाएगा ।
-जरा भी तनाव हो जाए, टकराव हो जाए, निराशा आ जाए, उत्साह में कमी आ जाए, तुरंत अच्छे अच्छे गीत सुना करो । आप में खुशी आ जायेगी और खुशी सब रोगो और बिगड़े संबंधो का इलाज करती है ।
-प्रतिदिन अगर 20 मिनिट हम संगीत सुनते हैं तो रोजमर्रा की होने वाली बीमारियो से हम बचाव कर सकते हैं ।
-कोमा में पड़ा एक बच्चा मां की लोरी सुन कर होश में आ गया ।
-योग से भरपूर संगीत ऐसी परिस्थिति में भी सार्थक सिद्व होता है ।
-कई लोग रोगो का कारण ग्रहो को मानते हैं ।
- प्रत्येक संगीत का सबंध किसी ना किसी ग्रह से होता हैं । जिस ग्रह से संबंधित कोई रोग हो वही संगीत सुनने से रोग ठीक हो जाते हैं ।
-आयुर्वेद रोगो का कारण वात, पित और कफ को मानता हैं ।
-संगीत वात, पित और कफ को संतुलित करता हैं ।
-एलोपेथी रोगो का कारण कीटाणु को समझता हैं ।
-संगीत बुरे कीटाणुओं को नष्ट करता हैं ।
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