आंतरिक बल 601

 


-मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम -55


-बिंदू रूप का अभ्यास -44- संगीत 


-मोर,  बैल,  बकरी,  कबूतर,  कोयल,  घोड़ा और हाथी की  आवाजों का हमारे पहले,  दूसरे,  तीसरे,  चौथे,  पांचवे,  छटे  और सातवे चक्र पर असर होता हैं । 


-भगवान की  याद के साथ साथ अगर हम इन जानवरो की  मनसा  सेवा करते हैं तो उस से हमारे ऊर्जा केंद्र जल्दी ऐक्टिवेट होते हैं । 


-मोर को मन में एमर्ज करो बीच में भगवान के बिंदू रूप को देखो ।  मोर के गले में कंठी चक्र को देखते हुए भगवान के गुण  गाओ बाबा आप प्यार के सागर हैं प्यार के सागर हैं ।  इस से आप की  तरंगे मोर की  तरंगो से टकरा कर बढ़ जायेगी और आप का पहला चक्र प्रभावित होगा । 


-ऐसे ही एक मोर के बजाय कल्पना में विश्व के सभी  मोरो को इमरज करके बिंदू रूप  का अभ्यास करें ।  आप की  तरंगे सभी मोरो से टकरा कर लौटेगी और आप के पहले चक्र को प्रभावित करेगी । 


-उपरोक्त सभी जानवरो को तरंगे देते जाओ ।  उनसे संबंधित   केंद्र शक्तिशाली बनते जाएंगे । 


-दूसरी विधि से भी हम अभ्यास कर सकते हैं । 


-अपना मन पहले चक्र पर लगाओ ।  वहां  पर बिंदू रूप देखो ।  पहले चक्र और अपने बीच बाबा को देखो ।  बाबा के गुण गाओ  आप प्यार के सागर हैं आप प्यार के सागर हैं ।   ऐसा करते हुए अपने मन में ऐसे समझो जैसे मोर की आवाज सुनाई दें रही हैं ।  मोर जैसी आवाज मन में निकाले ।  मन यह आवाज निकाल  सकता हैं ।  मुंह से आवाज नहीँ  करनी हैं ।  मन की यह आवाज पहले चक्र को अक्टिवेट करेगी । 


-ऐसे कल्पना करें की विश्व के सारे मोरो की आवाज सुनाई दें रही हैं ।  तो आप का मन सभी मोरो से टकराएगा और उनकी आवाज शक्तिशाली बन कर लौटेगी और पहले चक्र को प्रभावित करेगी । 


-ऐसे ही दूसरे चक्र को  चार्ज करने के लिये  एक बैल या हजारो बैलों को   तरंगे दो । 


-ऐसे ही तीसरे चक्र को जागृत करने लिये बकरियो को तरंगे दो । 


-4थे,  5 वें,  6वें और 7 वें चक्र को जागृत करने लिये कबूतर,  कोयल,  घोड़े और हाथियों को तरंगे देते रहो । 


-चलते फिरते इस तरह सहज  अभ्यास से हम अपने ऊर्जा चक्रों को  चार्ज कर सकते हैँ । 


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B K  Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516

    

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