-मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम -53
-बिंदू रूप का अभ्यास -42-संगीत
-सुव्यवस्थित ध्वनि जो रस की उत्पति करे संगीत कहलाती है ।
-गायन, वादन व नृत्य ये तीनो ही संगीत हैं ।
-गाना, बजाना और नाचना जीवन के अंग हैं ।
- युद्व, उत्सव, प्रार्थना या भजन के समय गाना बजाना होता हैं ।
-स्वर और लय की कला को संगीत कहते हैं ।
-हरेक स्वर किसी प्राणी की आवाज से संबंधित हैं ।
-संगीत के स्वर मानव के सात चक्रों को प्रभावित करते हैं ।
-मोर की आवाज वाली धुन मूल आधार चक्र को प्रभावित करती हैं ।
-इस चक्र के उपर बिंदू रूप देखो और परमात्मा के गुण गाओ आप प्यार के सागर हैं । ऐसा करते समय ऐसे महसूस करो जैसे मोर की आवाज सुनाई दें रही हैं ।
-अगर कोई मोर की आवाज वाली धुन पर गीत सुन रहा हैं तो उस गीत की धुन मन में गुनगुनाओ ।
-नेचूरल म्यूजिक्र में मोर की आवाज हो तो उसे योग में सुने ।
-अगर म्यूजिक नहीं हैं तो मन में मोर की आवाज सुनने की कोशिश करो ।
-बाबा आप प्यार के सागर है यह रिपीट करते हुए मोर की आवाज क्यों क्यों जैसे सुनाई दें रही है, महसूस करें ।
-बैल की आवाज वाली धुन स्वाधिषटान चक्र को प्रभावित करती है ।
-बकरी की आवाज वाली धुन मणिपुर चक्र को प्रभावित करती है ।
-कबूतर की आवाज वाली धुन अनाहत चक्र को प्रभावित करती है ।
-कोयल की आवाज वाली धुन विशुध्द चक्र को प्रभावित करती है ।
-घोड़े की आवाज वाली धुन आज्ञा चक्र को प्रभावित करती है ।
-हाथी की आवाज वाली धुन सहस्त्रार चक्र को प्रभावित करती है ।
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