-मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम -52
-बिंदू रूप का अभ्यास -41-संगीत
-शरीर रोगो के भार और मार से पूरी तरह टूट गया है ।
-चिकित्सक तन को तो समझते है, मन को नहीं समझते । वह यह नहीं जानते क़ि मन के कारण ही सभी बीमारियां होती है । कुछ डॉक्टर्स मन को रोगो का कारण मानते तो है परंतु मन की चिकित्सा क्या है, वह नहीं जानते । वह सिर्फ तन का इलाज करते रहते है जिस से बीमारी बढ़ती रहती है ।
-संगीत सुनने और योग लगाने से मानसिक और शारारिक रोग ठीक होते है मनुष्य यह नहीं जानता । वह संगीत सिर्फ मनोरंजन के लिये सुनता है ।
-संगीत सुनते हुए योग लगाते है तो दिमाग रेलेक्स्ड मोड में आ जाता है ।
-दिमाग में नई ऊर्जा का संचार होता है ।
-संगीत और योग दिमाग में नई एनर्जी का निर्माण करते है ।
-संगीत दिमाग में कारटिसोल स्तर को कम करता है जिस से दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है ।
- अगर कोई इंसान किसी तरह के दर्द से पीड़ित होता है तो उसे उसका मन पसंद गीत सुनाया जाना चाहिये ।
-इस से उसका ध्यान दर्द से हट जाता है और उसे दर्द का अहसास कम होता है ।
-संगीत से डोपमाइन का स्तर बढ़ जाता है जो खुशी का स्तर बढा देता है ।
-जिस की यादाश्त कम हो जाती है उसे भी संगीत सुनना चाहिए ।
-दोनो कान बंद करने पर शांय शांय की आवाज सुनाई देती है ।
-गहन ध्यान में भी सूक्ष्म आनंद की भी कुछ ऐसी ही अनुभूति होती है ।
-भगवान को याद करने से क्या अनुभूतियां होती हैं उसे संगीत से पहचाना जाता है ।
-कोई गीत आप के मन को बहुत आनंद देता है उसके आनंद की जो लय सी मन के अंदर बन रही है भगवान को याद करते हुए उसी लय को मन में गीत की तरह दोहराते रहो । वास्तव में आप को इसी अनुभूति की जरूरत है । बस भागवान को मन में देखते हुए इसे ही सारा दिन सुनते रहो । आप को असीम आनंद की अनुभूति होगी ।
-संगीत से ऐसी भावना उत्पन्ऩ होती है जो हमें भगवान की ओर सहज ही ले जाती है । सारा संसार साथ होते भी हम भगवान के रस में डूबे रहते हैं । किसी का मोह नहीं खींचता ।
-शारीरिक विकास, मानसिक विकास, सांस्कृतिक विकास के लिये आध्यात्मिक तत्व अर्थात भगवान की याद को सिर्फ विकसित भर करना हैं ।
-जलते हुए अंगारे में जो शक्ति है वही छोटी चिंगारी में भी है ।
-हम परमात्मा की संतान हैं । हमारे में भी वही शक्ति है । वह शक्ति हमारे में नाम मात्र है । आप को किस शक्ति को विकसित करने की जरूरत है उसका पता हमें संगीत से लागता है ।
-संगीत सुनने से जो चैन मिलता है बस उसी अनुभूति की आप को जरूरत है । भगवान के बिंदू रूप पर ध्यान करते हुए उसी आनंद को रिपीट करो जो आप को संगीत से हो रहा है ।
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