-मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम -50
-बिंदू रूप की साधना - 39 - संगीत
-परमात्मा आनंद स्वरूप है ।
-इस आनंद तत्व से ही संगीत की उत्पति हुई है ।
-इस लिये मंदिरो और गुरुद्वारों में कीर्तन गाते है जिस से सुख और शांति मिलती है ।
-सिमरन से भी ऐसी ही तरंगे बनती हैं जिस से सब को शांति मिलती है ।
-संगीत में विशेषज्ञ बनने लिये 10-15 साल लगते हैं ।
--ऐसे ही साधना में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिये भी 10-15 साल लगते हैं ।
-जिस व्यक्ति का स्वय पर नियंत्रण नहीं होता वह अपने को नीरस समझता हैं । वह सीख नहीं सकता । स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती हैं ।
-मस्तिष्क और स्मरण शक्ति को साधना से बढ़ा सकते हैं ।
-संगीत का मतलब है धुन ।
-योग का मतलब हैं अंदरूनी धुन ।
-संगीत का सबसे ज्यादा असर आज्ञा चक्र पर होता है ।
-मस्तिष्क में आत्म उन्नति की और ले जाने वाले केंद्र होते हैं । वे केंद्र संगीत और योग से विकसित होते हैं ।
-श्रवण, स्मृति और कल्पना भी संगीत से और योग से विकसित होती हैं ।
-संगीत और योग से मन और शरीर को भरपूर आनंद का अहसास होता हैं ।
-संगीत के सात स्वर होते है और ऐसे ही शरीर के भी सात शक्ति चक्र होते है जिनका एक दूसरे से गहरा सम्बन्ध है ।
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