आंतरिक बल -596?

 


-मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम -50


-बिंदू रूप की साधना - 39 - संगीत 


-परमात्मा आनंद  स्वरूप है । 


-इस आनंद तत्व से ही संगीत की उत्पति हुई है । 


-इस लिये मंदिरो और गुरुद्वारों में कीर्तन गाते  है  जिस से सुख और शांति मिलती है । 


-सिमरन से भी ऐसी ही तरंगे बनती हैं जिस से सब को शांति मिलती है । 


-संगीत में विशेषज्ञ बनने लिये 10-15 साल लगते हैं । 


--ऐसे ही साधना में  उत्कृष्टता  प्राप्त करने के लिये भी 10-15 साल लगते हैं । 


-जिस व्यक्ति का स्वय पर नियंत्रण नहीं होता वह अपने को नीरस समझता  हैं । वह सीख नहीं सकता  ।  स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती हैं । 


-मस्तिष्क और स्मरण शक्ति को साधना से बढ़ा  सकते हैं । 



-संगीत का मतलब है  धुन । 


-योग का मतलब हैं अंदरूनी धुन । 


-संगीत का सबसे ज्यादा असर आज्ञा चक्र पर होता है । 


-मस्तिष्क में आत्म उन्नति की और ले जाने  वाले केंद्र होते हैं । वे केंद्र संगीत और योग से विकसित होते हैं । 


-श्रवण,  स्मृति और कल्पना भी  संगीत से और योग से विकसित होती  हैं । 


-संगीत और योग से मन और शरीर को भरपूर आनंद का  अहसास  होता हैं । 


-संगीत के सात स्वर होते है और ऐसे ही शरीर के  भी सात शक्ति चक्र होते है जिनका  एक दूसरे से  गहरा सम्बन्ध है । 


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B K  Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516

    

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