-भोजन और पांच तत्व
-भोजन से शरीर का निर्माण और टूट फूट की पूर्ति होती है़ ।
-जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश से शरीर बना है़ ।
-सभी अनाज और दाले पृथ्वी तत्व मेंं आते हैंं ।
-शारीरिक मेहनत करने वालो को पृथ्वी तत्व की अधिक जरूरत होती है़ ।
-बुद्वि से कार्य करने वालो को पृथ्वी तत्व की कम जरूरत होती है़ ।
-25 वर्ष की आयु के बाद पृथ्वी तत्व के भोजन को आधा कर देना चाहिए ।
-वह आधा खाना भी सिर्फ शाम को ही खाना चाहिए ।
-जल तत्व
- जल तत्व मेंं सिर्फ सब्जियां आती हैंं ।
-ऐसी सब्जियां जो जमीन के ऊपर होती हैंं ।
-कददू , लौकी, परवल, तोरई, टिनड्डा' , गोभी आदि ।
-इन सब्जियों मेंं पानी अधिक होता है़ और इन मेंं शरीर से मल निकालने की शक्ति होती है़ ।
-आलू, .शक्कर कंदी आदि मेंं जल तत्व कम और पृथ्वी तत्व अधिक होता है़ ।
-अग्नि तत्व
-फ्रूट्स .( फल ) मेंं अग्नि तत्व ज्यादा होता है़ ।
-फल धूप मेंं रहते हैंं ।
-जब फल खाते हैंं तो अग्नि तत्व हमारे शरीर मेंं ज्यादा जाता है़ ।
-रसदार फलों मेंं शरीर को शुद्व करने की शक्ति होती है़ ।
-वायु तत्व
-वायु तत्व पतियों मेंं होता है़ ।
-तुलसी तथा बेल की पत्तियां शरीर को शुद्व करती हैंं ।
-धनिया, पुदीना, बथुआ, पालक, चौलाई, पतागोभी भी पत्तेदार सब्जियां हैं ।
-आकाश तत्व
-यह सूक्ष्म तत्व है़ । यह खाया नहीं जाता ।
-जब तक पेट कुछ खाली नहीं रखा जाए यह प्राप्त नहीं होता ।
-उपवास से भी आकाश तत्व प्राप्त होता है़ ।
-अगर आप आकाश तत्व से भरपूर होना चाहते हैंं तो सुबह 12 बजे तक सिर्फ पानी पर रहना चाहिए । परंतु यह नियम अपने शरीर को देख कर अपनाए । किसी अनुभवी उपवास कर्ता से राय ले लें । नहीं तो उपवास में फलों का रस लेते रहें और इसे जरूर अपनाए । आप की काया कंचन बन जाएगी ।
-कारोना के दौर में भूखा नही रहना अगर उपवास करना ही है तो फल या हरी सब्जियां जरूर खानी हैं !
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