आंतरिक बल 1016

 


-भोजन और पांच तत्व 


-भोजन से शरीर का निर्माण  और टूट फूट की पूर्ति  होती है़ । 


-जल,  पृथ्वी,  वायु,  अग्नि और आकाश से शरीर बना  है़ । 


-सभी अनाज और  दाले पृथ्वी  तत्व मेंं आते हैंं  । 


-शारीरिक मेहनत करने वालो को पृथ्वी तत्व की अधिक जरूरत होती है़ । 


-बुद्वि से कार्य करने वालो को पृथ्वी तत्व की कम जरूरत होती है़ । 


-25 वर्ष की आयु के बाद पृथ्वी तत्व के भोजन को आधा कर देना चाहिए ।  


-वह आधा खाना भी सिर्फ शाम को ही खाना चाहिए । 


-जल तत्व 


- जल तत्व मेंं सिर्फ सब्जियां  आती  हैंं  । 


-ऐसी सब्जियां  जो जमीन  के ऊपर होती हैंं  । 


-कददू , लौकी,  परवल,  तोरई,  टिनड्डा'  ,  गोभी आदि । 


-इन सब्जियों मेंं पानी  अधिक होता है़ और इन मेंं शरीर से मल निकालने की शक्ति होती है़ । 


-आलू, .शक्कर कंदी  आदि मेंं जल तत्व कम और पृथ्वी तत्व अधिक होता है़ । 


-अग्नि तत्व 


-फ्रूट्स  .( फल )  मेंं अग्नि तत्व ज्यादा होता है़ । 


-फल धूप मेंं रहते हैंं  । 


-जब फल खाते हैंं  तो अग्नि तत्व हमारे शरीर मेंं ज्यादा जाता है़ । 


-रसदार  फलों  मेंं शरीर को शुद्व करने की शक्ति होती है़ । 


-वायु तत्व 


-वायु तत्व पतियों मेंं होता है़  । 


-तुलसी तथा बेल की  पत्तियां शरीर को शुद्व करती हैंं । 


-धनिया,  पुदीना,  बथुआ,  पालक,  चौलाई,  पतागोभी भी पत्तेदार सब्जियां  हैं । 


-आकाश तत्व 


-यह सूक्ष्म तत्व है़  ।  यह खाया नहीं जाता । 


-जब तक पेट कुछ खाली  नहीं रखा जाए  यह प्राप्त नहीं होता । 


-उपवास से भी आकाश तत्व प्राप्त होता है़ । 


-अगर आप आकाश तत्व से भरपूर होना चाहते हैंं तो सुबह 12 बजे तक सिर्फ पानी पर रहना चाहिए । परंतु  यह नियम अपने शरीर को देख कर अपनाए ।  किसी अनुभवी उपवास कर्ता  से राय ले  लें । नहीं तो उपवास में फलों का रस लेते रहें और इसे जरूर अपनाए ।  आप की काया कंचन बन  जाएगी । 


-कारोना के दौर में भूखा नही रहना अगर उपवास करना ही है तो  फल  या  हरी  सब्जियां  जरूर खानी हैं  !


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B K  Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516

    

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