-भोजन के नियम
-जीवित रहने के लिये तीन चीजो की जरूरत होती हैंं ।
-भोजन, नींद और साधना ।
-भोजन से स्थूल शरीर का निर्माण व टूटे फूटे कोशों की मुरम्मत होती है ।
-नींद से मानसिक शक्ति मिलती हैंं । जब हम सोते हैंं तो भगवान से जुड़ जाते हैंं और भगवान से शक्ति पा कर दुबारा चार्ज हो जाते हैंं । सुबह तरोताजा हो कर कार्य करते हैंं ।
-साधना अर्थात राजयोग अर्थात जागृत अवस्था मेंं भगवान से जुड़े रहते हैंं और भगवान की शक्ति से हमें थकावट नहीं होती और सभी अच्छे कार्य करते हैंं ।
-सवेरे से शाम तक काम करने से शरीर के कोश टूटते हैंं' उस से वजन कम होता है़ । दूसरा हमारी मानसिक शक्ति कम हो जाती हैं जिस से हमें थकावट, कमजोरी या शिथिलता का अनुभव होता है़ ।
-जब हम भोजन कर के सो जाते हैं तब खाना हजम हो जाता है़ और उस से रस बनते हैं, जिस से घटा हुआ वजन पूरा हो जाता है़ ।
-इस के साथ साथ नींद मेंं हमारा मन भगवान से जुड़ कर दुबारा चार्ज हो जाता है़ ।
-सुबह जागने के बाद मानसिक शक्ति शरीर की सफाई मेंं लगी रहती है़ । इस लिये उस पर खाने का बोझ नहीं डालना चाहिए ।
-पूर्ण भोजन तो रात्रि मेंं ही लेना चाहिए जब विश्राम मेंं जाते हैं ।
-भोजन के बारे कहते हैं, दोपहर तक आकाश तत्व लेना चाहिए अर्थात कुछ भी नहीं लेना चाहिए ।
-दोपहर मेंं वायु और अग्नि तत्व अर्थात सलाद और फल लेने चाहिए ।
-रात मेंं पृथ्वी और जल तत्व अर्थात अनाज और सब्जी लेंनी चाहिए ।
-गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए ।
-जिसे आप बिना लाठी और बिना घाव किए मारना चाहते हैं, उसे गरिष्ठ भोजन की सलाह दें ।
- गरिष्ठ आहार हमेशा ही शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
- गरिष्ट आहार में मसाले एवं ऐसे पदार्थ होते हैं, जिनका पाचन बहुत मुश्किल से हो पाता है।
- अगर आप रात को गरिष्ट भोजन करते हैं तो वह बहुत ही धीरे-धीरे पचता है, जिसके कारण अपचन, एसिडिटी, कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं।
- अगर किसी कारण से आपने रात को गरिष्ट भोजन कर लिया है तो सोने से पहले टहलना न भूलें।
-सभी तली हुई चीजे, मिठाईया, समोसे, मठिया, पकवान आदि गरिष्ठ भोजन मेंं आते है़ ।
- अधिक भोजन करने से अधिक लाभ होगा। इस प्रवृत्ति को बदलना चाहिए।
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