आंतरिक बल 1015

 

-भोजन के नियम 


-जीवित रहने के लिये  तीन चीजो की  जरूरत होती हैंं । 


-भोजन,  नींद और  साधना । 


-भोजन से स्थूल शरीर का निर्माण व टूटे फूटे कोशों की मुरम्मत होती है ।  


-नींद से मानसिक  शक्ति मिलती हैंं । जब हम सोते  हैंं तो भगवान से जुड़ जाते हैंं  और भगवान से शक्ति पा कर दुबारा चार्ज हो  जाते हैंं । सुबह तरोताजा हो  कर कार्य करते हैंं ।


-साधना अर्थात राजयोग अर्थात  जागृत अवस्था मेंं भगवान से जुड़े रहते हैंं और भगवान की शक्ति से  हमें थकावट  नहीं होती  और सभी अच्छे कार्य करते हैंं । 


-सवेरे से शाम तक काम करने से शरीर के कोश टूटते हैंं'  उस से वजन कम होता है़  ।  दूसरा हमारी मानसिक शक्ति कम हो  जाती हैं जिस से हमें थकावट,  कमजोरी   या शिथिलता का अनुभव होता है़  । 


-जब हम भोजन कर के सो जाते हैं  तब     खाना  हजम हो  जाता है़ और उस से  रस बनते हैं,   जिस से घटा हुआ वजन पूरा हो  जाता है़ । 


-इस के साथ साथ नींद मेंं हमारा मन भगवान से जुड़ कर दुबारा चार्ज हो जाता  है़ । 


-सुबह जागने के बाद मानसिक शक्ति शरीर की सफाई मेंं लगी रहती है़ । इस लिये   उस पर खाने का बोझ नहीं डालना चाहिए । 


-पूर्ण भोजन तो रात्रि मेंं ही लेना चाहिए जब विश्राम मेंं जाते हैं  । 


-भोजन के बारे कहते हैं,  दोपहर तक आकाश तत्व लेना  चाहिए  अर्थात कुछ भी नहीं लेना चाहिए । 


-दोपहर मेंं वायु और अग्नि तत्व अर्थात सलाद और फल लेने चाहिए । 


-रात मेंं पृथ्वी और जल तत्व अर्थात अनाज और सब्जी लेंनी चाहिए । 


-गरिष्ठ  भोजन से बचना चाहिए । 


-जिसे आप बिना लाठी और बिना घाव किए  मारना चाहते हैं,  उसे गरिष्ठ भोजन की सलाह दें । 


- गरिष्ठ आहार हमेशा ही शरीर को नुकसान पहुंचाता है।


-  गरिष्ट आहार में मसाले एवं ऐसे पदार्थ होते हैं, जिनका पाचन बहुत मुश्किल से हो पाता है।


-  अगर आप रात को गरिष्ट भोजन करते हैं तो वह बहुत ही धीरे-धीरे पचता है, जिसके कारण अपचन, एसिडिटी, कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं।


- अगर किसी कारण से आपने रात को गरिष्ट भोजन कर लिया है तो सोने से पहले टहलना न भूलें।


-सभी तली हुई चीजे,  मिठाईया, समोसे,  मठिया,  पकवान आदि  गरिष्ठ भोजन मेंं आते है़ । 


-  अधिक भोजन करने से अधिक लाभ होगा। इस प्रवृत्ति को बदलना चाहिए।


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