-मानसिक शक्ति और शरीर (2 )
-आंख से देखने , कान से सुनने, मुंह से बोलने, नाक से सूंघने, सब मेंं मानसिक शक्ति नष्ट होती है़ ।
-यही कारण है़ टी. वी. या पिक्चर देखते देखते थकावट आ जाती है़ ।
-सब से अधिक शक्ति ब्रह्मचर्य तोड़ने मेंं खर्च होती है़ ।
-इस से कम शक्ति बोलने और देखने मेंं खर्च होती है़ ।
-दया, क्षमा, सत्य, प्रेम, मैत्री, मुदिता, सेवा, शांति, त्याग, भलाई, परहित चिन्तन के विचार उठते हैं तब हमारे शरीर मेंं अमृतमय पाचक रसो का निर्माण होता है ।
-इन रसो से शरीर रोग रहित बनता है ।
-इन विचारों से पेट मेंं जो तेजाब बनता है वह खत्म हो जाता है ।
-क्रोध के समय सांस और रक्त विषेला हो जाता है ।
-क्रोध मेंं माताओं द्वारा दूध पिलाने पर बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है ।
-घास और दूध मेंं शरीर के निर्माण के तत्व पाए जाते हैं ।
- दूध के इलावा सारे अंगो को शक्ति देने के लिये ऊर्जा का स्त्रोत गहरी नींद है ।
-मानसिक शक्ति का पहला काम भोजन को पचाना है और दुसरा काम है शरीर की सफाई करना ।
-भोजन जो हम खाते हैं उस का स्थूल भाग विष्टा बन जाता है़, मध्यम से मांस और सुक्ष्त्म से मन का निर्माण होता है़ ।
-दही को बिलौने पर उस का सूक्ष्म अंश ऊपर उठ कर माखन बन जाता है़ ।
-बिजली से बैटरी चार्ज होती है़ ।
- ऐसे ही नींद से हमारे मन की चार्जिंग होती है़ ।
-नींद मेंं ही शरीर की मुरम्मत होती है़ ।
-सभी मानते है़ क़ि काम करने से भोजन पचता है़ ।
-परंतु हकीकत यह है़ क़ि मानसिक शक्ति भोजन को पाचाती है़ ।
-अगर खाना खाते ही हम काम करते है़ तो मानसिक शक्ति को डबल कार्य करना पड़ता है़ ।
-पेट मेंं भोजन पहुचते ही आंशिक शक्ति इसे पचाने मेंं लग जाती है़ । दुसरा जो कार्य करते हैं उस पर खर्च होती है़ ।
-भोजन खाते ही अगर हम कार्य करते है़ तो मानसिक शक्ति के पाचन के कार्य मेंं बाधा पड़ जाती है़ ।
- उत्तम यह है़ क़ि भोजन करते ही हम सो जाएं या कुछ देर आराम करें तो मानसिक शक्ति भोजन को ठीक तरह से पचा सकती है़ । फिर हम सारा दिन फुर्ती से कार्य कर सकेगे ।
-जीवन को नई दिशा देने वाली - आन्तरिक बल ( भाग -1 ) - पुस्तक लेने के लिए संपर्क करें ! आप अपना नाम, पूरा पोस्टल पता , पिन नम्बर और फोन नम्बर मेरे व्हाटसअप नम्बर 9896348516 पर लिख कर भेजें ! मैं आप को कोरियर से पुस्तक भेज दूंगा !
- यह पुस्तक आप को पसंद आएगी ! पसंद आने पर इस की लागत राशी भेज देना ! दूसरो के कल्याण हेतू आप अपनी मर्जी से अधिक आर्थिक सहयोग भी भेज सकते हैं ! अगर आप को आर्थिक चैलेंज है तो मुझे सूचित करना मैं आप को गिफ्ट के रूप में भेज दूंगा ! चाहे आप कितने भी व्यस्त हैं, विश्व का कल्याण कर रहे हैं या अंश मात्र भी तन, मन, धन और संबंधों में अतृप्ति है, कृपया एक बार यह पुस्तक जरूर पढ़ें ! आप के पढ़ने मात्र से, आप को , आप के आस पास वालों को , आप के प्रिय लोगों और सारे विश्व को लाभ मिलेगा !
B K Milakh Raj Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516
Comments
Post a Comment