आंतरिक बल 1012

 


-मानसिक शक्ति और शरीर  (2 ) 


-आंख से देखने ,  कान से सुनने,  मुंह से बोलने,  नाक से सूंघने,  सब मेंं मानसिक शक्ति नष्ट होती है़  । 


-यही कारण है़ टी. वी. या पिक्चर देखते देखते थकावट आ जाती है़ । 


-सब से अधिक शक्ति ब्रह्मचर्य  तोड़ने मेंं खर्च होती है़ । 


-इस से कम शक्ति बोलने और देखने मेंं खर्च होती है़ । 


-दया,  क्षमा,  सत्य,  प्रेम,  मैत्री,  मुदिता, सेवा, शांति,  त्याग,  भलाई,  परहित चिन्तन के विचार उठते हैं  तब हमारे शरीर मेंं अमृतमय पाचक रसो का निर्माण होता है । 


-इन रसो  से शरीर रोग रहित बनता है  । 


-इन विचारों से पेट मेंं जो तेजाब बनता है वह  खत्म हो जाता है । 


-क्रोध के समय सांस और रक्त विषेला हो जाता है । 


-क्रोध मेंं माताओं द्वारा दूध पिलाने पर बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है । 


-घास और दूध मेंं शरीर के निर्माण के तत्व पाए जाते हैं । 


- दूध के इलावा सारे अंगो को शक्ति देने के लिये ऊर्जा का स्त्रोत गहरी नींद  है । 


-मानसिक  शक्ति का पहला काम भोजन को पचाना  है  और दुसरा काम है शरीर की सफाई करना । 


-भोजन जो हम खाते हैं उस का स्थूल भाग विष्टा  बन  जाता है़,  मध्यम से मांस और सुक्ष्त्म से मन का निर्माण होता है़ । 


-दही को   बिलौने पर उस का सूक्ष्म अंश ऊपर उठ कर माखन बन  जाता है़ । 


-बिजली से बैटरी चार्ज होती है़ । 


- ऐसे ही नींद से हमारे मन की चार्जिंग होती है़ । 


-नींद मेंं ही शरीर की मुरम्मत होती है़ । 


-सभी मानते  है़ क़ि  काम करने से भोजन पचता है़ । 


-परंतु हकीकत यह है़ क़ि   मानसिक शक्ति  भोजन को पाचाती  है़ । 


-अगर खाना खाते ही हम काम करते है़  तो मानसिक शक्ति को डबल कार्य करना पड़ता है़ । 


-पेट मेंं भोजन पहुचते ही  आंशिक शक्ति इसे पचाने मेंं लग जाती है़ । दुसरा जो कार्य करते हैं उस पर खर्च होती है़  । 


-भोजन  खाते ही अगर हम कार्य करते है़ तो मानसिक शक्ति  के पाचन के कार्य मेंं बाधा पड़  जाती है़ । 


- उत्तम यह  है़ क़ि भोजन करते ही हम सो जाएं या कुछ देर आराम करें तो मानसिक शक्ति  भोजन को ठीक तरह  से पचा सकती है़ । फिर हम सारा दिन फुर्ती से कार्य कर सकेगे । 


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B K  Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516

    

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