बदलता परिवेश और रहन-सहन शहर में मधुमेह के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा कर रहा है। खान-पान पर नियंत्रण न होना भी इसके लिए जिम्मेदार है। डायबिटीज के मरीज को सिरदर्द, थकान जैसी समस्याएं हमेशा बनी रहती हैं। मधुमेह में खून में शुगर की मात्रा बढ जाती है। ऐलोपैथिक में इसका कोई स्थायी इलाज नहीं मिल पाया है परन्तु आयुर्वेद के उपायों, जीवनशैली में बदलाव, शिक्षा तथा खान-पान की आदतों में सुधार द्वारा रोग को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
मधुमेह के कारण और प्रकार
हम जो भी खाते है उसे हमारा पाचन तंत्र ग्लूकोज बना कर रक्त में भेज देता है । इसे हमारे शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाने के लिए इंन्सुलीन नामक हारमोन की जरुरत होती है। जब हमारा शरीर इंसुलिन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं होता है , तब ग्लुकोज रक्त में बढता जाता है मगर कोशिकाओं के अन्दर नहीं घुस पाताहै । यही मधुमेह कहलाता है।
मधुमेह मुख्यतः दो तरह का होता है।
टाइप - 1 :-- इसमें पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकाएँ पूर्णतः नष्ट हो जाती हैं और इस तरह शरीर में इंन्सुलीन का बनना सम्भव नहीं होता है। अनुवांशिक कारणों , आँटो इम्युनिटी एवं किसी प्रकार के वाइरल संक्रमण के कारण बचपन में ही बीटा कोशिकाएँ पूर्णतः नष्ट हो जाती हैं। यह बीमारी मुख्यतः 12 से 25 साल से कम अवस्था में मिलती है। भारत में यह बहुत ही कम मात्र 1% से 2% केसों में ही टाइप-1 के मरीज़ पाये जाते है। यूरोप विशेषकर स्वीडेन एवं फिनलैण्ड आदि में लोगो में टाइप-1 मधुमेह काफी पाया जाता है। ऐसे मरीजों को इंसुलीन की सूई अनिवार्य रूप से दी जाती है।
टाइप - 2 :-- भारत में ज्यादातर 98% तक मधुमेह के रोगीयों में टाइप-2 का मधुमेह पाया जाता हैं। ऐसे मरीजों में बीटा कोशिकाएँ कुछ-कुछ इन्सुलीन बनाती है। लेकिन यह थोड़ा बहुत बना हुआ इंसुलीन मोटापे, गलत / अनियमित खान पान एवं शारीरिक श्रम की कमी के कारण व्यर्थ हो जाता है। ऐसे मरीजों के ईलाज के लिए कई तरह की दवाईयाँ उपलब्ध है लेकिन कोई भी विशेष कारगर नहीं है इसलिए उन्हें जीवन भर दवाएँ खानी पड़ती है और कई बार इंसुलीन भी देना पड़ता है।
मधुमेह के लक्षण :------
1. बार-बार पेशाब आना।
2. बहुत ज्यादा प्यास लगना।
3. बहुत पानी पीने के बाद भी गला सूखना।
4. खाना खाने के बाद भी बहुत भूख लगना।
5. मितली होना और कभी-कभी उल्टी होना।
6. हाथ-पैर में अकड़न और शरीर में झंझनाहट होना।
7. हर समय कमजोरी और थकान की शिकायत होना।
8. आंखों से धुंधलापन होना।
9. त्वचा या मूत्रमार्ग में संक्रमण।
10. त्वचा में रूखापन आना।
11. चिड़चिड़ापन।
12. सिरदर्द।
13. शरीर का तापमान कम होना।
14. मांसपेशियों में दर्द।
15. वजन में कमी होना।
यदि हम थोड़ी सी सावधानी बरते, अपने जीवनशैली , खान-पान की आदतों में सुधार करें तो इसपर अवश्य ही विजय प्राप्त कर सकते है।
1 तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इनसुलिन के लिये सहायक होते है । इसलिए शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते को प्रतिदिन खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।
2 10 मिग्रा आंवले के जूस को 2 ग्राम हल्दी के पावडर में मिला लीजिए। इस घोल को दिन में दो बार लीजिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
3 काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है। मधुमेह के रोगियों को काले नमक के साथ जामुन खाना चाहिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
4 लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे ब्लड शुगर लेवल को कम करने के साथ वजन को भी नियंत्रण करने में मदद मिलेगी।
5 करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका कड़वा रस शुगर की मात्रा कम करता है।अत: इसका रस रोज पीना चाहिए। उबले करेले के पानी से मधुमेह को शीघ्र स्थाई रूप से समाप्त किया जा सकता है।
6 मधुमेह के उपचार के लिए मैथीदाने का बहुत महत्व है, इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मैथीदानों का चूर्ण नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून पानी के साथ लेना चाहिए ।
7 काँच या चीनी मिट्टी के बर्तन में 5-6 भिंडियाँ काटकर रात को गला दीजिए, सुबह इस पानी को छानकर पी लीजिए।
8 मधुमेह मरीजो को नियमित रूप से दो चम्मच नीम और चार चम्मच केले के पत्ते के रस को मिलाकर पीना चाहिए।
9 ग्रीन टी भी मधुमेह मे बहुत फायदेमंद मानी जाती है ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं जो एक मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व हैं, शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है।
10 सहजन के पत्तों में दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित सेवन से भी लाभ प्राप्त होता है ।
11 एक टमाटर, एक खीरा और एक करेला को मिलाकर जूस निकाल लीजिए। इस जूस को हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट लीजिए। इससे डायबिटीज में बहुत फायदा होता है।
12 गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों से रस निकालकर प्रतिदिन सेवन करने से भी मुधमेह नियंत्रण में रहता है।
13 मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में खीरा नींबू निचोड़कर खाकर भूख मिटाना चाहिए।
14 मधुमेह उपचार मे शलजम का भी बहुत महत्व है । शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग भी ज्यादा करना चाहिए।
15 6 बेल पत्र , 6 नीम के पत्ते, 6 तुलसी के पत्ते, 6 बैगनबेलिया के हरे पत्ते, 3 साबुत काली मिर्च ताज़ी पत्तियाँ पीसकर खाली पेट, पानी के साथ लें और सेवन के बाद कम से कम आधा घंटा और कुछ न खाएं , इसके नियमित सेवन से भी शुगर सामान्य हो जाती है ।
16 नई शोध में अदरक मधुमेह की बीमारी में बेहद कारगर साबित हुई है। आस्ट्रेलिया में किये गए एक शोध के अनुसार अदरक का रस खून में शर्करा के स्तर को पूरी तरह से नियंत्रित करता है। पुराने से पुराने मधुमेह में भी जिसमें शरीर के अंग भी प्रभावित हो चुके हो नित्य खाली पेट अदरक का रस बेहद फायदेमंद है।
17 मधुमेह में सोया आटे की रोटी खानी चाहिए । सोयाबीन में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट बहुत कम मात्रा में होता है और यही चीज़े मधुमेह में हानिकारक होती है अत: सोयाबीन को पीस कर आटे में मिलाकर खाने से मधुमेह नियंत्रण में रहता है ।
18 मधुमेह के शिकार व्यक्ति को अपने आहार में एलो वेरा जूस को अवश्य ही शामिल करना चाहिए। एलो वेरा में मौजूद विभिन्न प्रकार के विटामिन्स, मिनरल्स, खनिज शरीर के सेल स्तर पर काम करते है जिससे शरीर शर्करा की मात्रा नियंत्रित होती है और व्यक्ति चुस्त और दुरुस्त भी रहता है।
19 मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति के लिए अलसी का सेवन उपयुक्त है । अलसी को मिक्सी में पीसकर आटा में मिलकर इसकी रोटी खाएं । इससे शरीर में लम्बे समय तक ताकत रहती है ।
20 मधुमेह में नित्य अमरुद का सेवन करें । इसे महीन महीन काट काट कर उसपर सेंधा / काला नमक और काली मिर्च छिड़क कर खाना चाहिए, इससे मधुमेह में बहुत ज्यादा आराम मिलता है ।
21 मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए दक्षिण की तरफ सर करके सोएं , अपने बैडरूम में कम से कम 100 ग्राम का साबुत फिटकरी का टुकड़ा अवश्य ही रखें । इससे मधुमेह को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है ।

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